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जानिए प्रतिदिन शाखा क्यों आवश्यक है?

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संघ परिचय   "शाखा" सभी कार्यों का अधिष्ठान है क्योंकि प्रत्येक कार्य के लिए आवश्यक योग्य, समर्पित, ध्येयनिष्ठ कार्यकर्ताओं का निर्माण इस पद्धति से ही संभव। यह विगत 90 वर्षों से संघ कार्य से सिद्ध हुआ है। ● दैनिक मिलन की अभिनव कार्य पद्धति का विकास संघ ने किया।   ● संग़ठन का स्वरुप प्रतिदिन निश्चित समय व निश्चित स्थान पर एकत्रित होना।   ●   व्यक्ति के विकास व उसके स्वाभाविक दोषों को दूर करने के लिए निरंतर संस्कार, अभ्यास, ध्येय के अनुरूप सत्संग।   ● एक घंटे संस्कार की योजना। जैसे-नित्य पूजा करना आदि।   ● यह संस्कार नित्य तथा निरंतर मिलने चाहिए, अतः इसके लिए शाखा में दैनिक उपस्थिति अपेक्षित। ● शाखा के दैनिक कार्यक्रमों से उत्साह,पराक्रम निर्भयता, अनुशासन, सूत्रबद्धता, विजयवृति।

हिंदुत्व

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हिन्दुत्व हिन्दू धर्म के अनुयायियों को एक और अकेले राष्ट्र में देखने की अवधारणा है। हिन्दुत्ववादियों के अनुसार हिन्दुत्व कोई उपासना पद्धति नहीं, बल्कि हिन्दू लोगों द्वारा बना एक राष्ट्र है। वीर सावरकर ने हिन्दुत्व और हिन्दूशब्दों की एक परिभाषा दी थी जो हिन्दुत्ववादियों के लिये बहुत महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हिन्दू वो व्यक्ति है जो भारत को अपनी पितृभूमि और अपनी पुण्यभूमि दोनो मानता है। हिन्दू धर्म को सनातन, वैदिक या आर्य धर्म भी कहते हैं। हिन्दू एक अप्रभंश शब्द है। हिंदुत्व या हिंदू धर्म को प्राचीनकाल में सनातन धर्म कहा जाता था। एक हजार वर्ष पूर्व हिंदू शब्द का प्रचलन नहीं था। ऋग्वेद में कई बार सप्त सिंधु का उल्लेख मिलता है। सिंधु शब्द का अर्थ नदी या जलराशि होता है इसी आधार पर एक नदी का नाम सिंधु नदी रखा गया, जो लद्दाख और पाक से बहती है। भाषाविदों का मानना है कि हिंद-आर्य भाषाओं की 'स' ध्वनि ईरानी भाषाओं की 'ह' ध्वनि में बदल जाती है। आज भी भारत के कई इलाकों में 'स' को 'ह' उच्चारित किया जाता है। इसलिए सप्त सिंधु अवेस्तन भाषा (पारसियों की भाषा) ...